नीट-यूजी 2024 पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख अवलोकन
नीट-यूजी 2024 पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट का रूख
नीट-यूजी 2024 की मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक मामले ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां दी हैं, जो छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
परीक्षा रद्द करने का अंतिम विकल्प
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा को रद्द करना एक अंतिम उपाय होगा। न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पहले पेपर लीक की प्रकृति का निर्धारण किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि परीक्षा की पवित्रता अगर भंग हो चुकी है और लीक सोशल मीडिया के माध्यम से फैल चुका है, तभी रि-टेस्ट का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय गंभीरता से लिया जाना चाहिए और केवल उन मामलों में जहां परीक्षा की पवित्रता से समझौता हो चुका हो।
सीबीआई को स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया है कि वह 11 जुलाई तक इस मामले में स्थिति रिपोर्ट पेश करे। इससे पता चलेगा कि पेपर लीक की घटना किस हद तक फैली है और इसके पीछे कौन लोग हैं।
कोर्ट ने कहा कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाए और उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए।

23 लाख छात्रों के लिए रि-टेस्ट की संभावना
कोर्ट ने कहा कि 23 लाख छात्रों के लिए रि-टेस्ट करवाना एक बड़ी चुनौती होगी और इसे पूरी गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। न्यायालय ने पूछा कि क्या सरकार ने इस घटना पर संतोषजनक प्रतिक्रिया दी है और क्या दोषियों को पहचाना गया है।
कोर्ट ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय विद्यार्थियों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है और इसे 'प्रतिकूल' आम जनता के हित के खिलाफ बताया।
केंद्र और एनटीए का विरोध
इस बीच, केंद्र और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने के विचार का विरोध करते हुए इसे 'नुकसानदायक' बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करने से छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इसके दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं।

गुजरात के सफल उम्मीदवारों की याचिका
इस बीच, गुजरात के 50 से अधिक सफल नीट-यूजी उम्मीदवारों ने एक अलग याचिका में अपील की कि केंद्र और एनटीए को परीक्षा को निरस्त करने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा निरस्त करने से उन पर अन्याय होगा जिन्होंने इसे सफलतापूर्वक पास किया है।
इस मामले में अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर हैं, जो छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सर्वोच्च महत्व रखता है।
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