NIRF Ranking 2024: भारत के शीर्ष 10 संस्थान और प्रत्येक श्रेणी के शीर्ष 5 संस्थान

NIRF Ranking 2024: भारत के शीर्ष 10 संस्थान और प्रत्येक श्रेणी के शीर्ष 5 संस्थान

अग॰, 12 2024

NIRF रैंकिंग 2024: भारत के शीर्ष शैक्षिक संस्थान

राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) ने 2024 के लिए भारत के शीर्ष शैक्षिक संस्थानों की सूची जारी कर दी है। यह रैंकिंग छात्रों और संस्थानों दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर आधारित होती है। इनमें शिक्षण, सीखने और संसाधन, अनुसंधान और व्यावसायिक प्रथाएं, स्नातक परिणाम, पहुंच और समावेशिता, और धारणा जैसे महत्वपूर्ण मानदंड शामिल हैं।

शीर्ष 10 कुल संस्थान

NIRF द्वारा जारी की गई इस रैंकिंग में शीर्ष 10 कुल संस्थानों की सूची इस प्रकार है:

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे
  • भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरु
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़
  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

प्रत्येक श्रेणी के शीर्ष 5 संस्थान

इसके अलावा, विशेष श्रेणियों में भी शीर्ष 5 संस्थानों की सूची जारी की गई है। यहाँ पर प्रत्येक श्रेणी के शीर्ष 5 संस्थानों की जानकारी दी जा रही है:

इंजीनियरिंग

  • आईआईटी, मद्रास
  • आईआईटी, दिल्ली
  • आईआईटी, बॉम्बे
  • आईआईटी, कानपुर
  • आईआईटी, खड़गपुर

प्रबंधन

  • आईआईएम, अहमदाबाद
  • आईआईएम, बंगलुरु
  • आईआईएम, कोलकाता
  • आईआईएम, लखनऊ
  • आईआईएम, इंदौर

विश्वविद्यालय

  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
  • जामिया मिलिया इस्लामिया
  • अमृता विश्वविद्यालय
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय

फार्मेसी

  • जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय
  • राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, मोहाली
  • पंजाब विश्वविद्यालय
  • राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल अनुसंधान संस्थान, अहमदाबाद
  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी

इस रैंकिंग को तैयार करने के लिए कई विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने कड़ी मेहनत की। यह सुनिश्चित करने के लिए, कि रैंकिंग प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो, कई प्रमुख व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है। इन रैंकिंग का एक मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को सही जानकारी मिल सके, जिससे वे अपने करियर के लिए उपयुक्त संस्थान चुन सकें।

रैंकिंग के महत्व

NIRF रैंकिंग के द्वारा छात्रों को अपने करियर की दिशा चुनने में बहुत मदद मिलती है। यह रैंकिंग संस्थानों के शैक्षिक गुणवत्ता, संसाधन और अनुसंधान की क्षमताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी देती है। इसके अतिरिक्त, यह संस्थानों को भी अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर प्रदान करती है।

इस रैंकिंग का उपयोग सरकार और नीति निर्माताओं द्वारा भी किया जाता है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उचित नीतियां विकसित की जा सकती हैं। इस प्रकार, NIRF रैंकिंग न केवल छात्रों और संस्थानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे शिक्षा प्रणाली को भी बेहतर बनाने में सहायक है।

एनआईआरएफ रैंकिंग की प्रक्रिया

NIRF रैंकिंग प्रक्रिया को कई चरणों में विभाजित किया गया है। सबसे पहले, सभी संस्थानों को अपना नामांकन कराना होता है। इसके बाद, संस्थानों को विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्रदान करनी होती है, जैसे शिक्षण गुणवत्ता, अनुसंधान, स्नातक परिणाम आदि। इन सभी जानकारी का मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है और उसके आधार पर रैंकिंग निर्धारित की जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया में कई प्रकार के मापदंडों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि संस्थान की उपलब्धियाँ, उसके द्वारा किए गए अनुसंधान, शिक्षा के लिए उपलब्ध संसाधन, स्नातक की प्रगति आदि। यही नहीं, संस्थान की सामाजिक समावेशिता और इसके प्रति जन धारणा भी मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अंत में, एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसमें सभी संस्थानों की रैंकिंग का विवरण होता है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से जारी की जाती है, जिससे सभी को रैंकिंग की प्रक्रिया और उसके परिणामों की जानकारी मिल सके।

NIRF रैंकिंग 2024 के परिणाम पूरी तरह से पारदर्शी और विश्वसनीय हैं। यह छात्रों के लिए सही निर्णय लेने में सहायक हो सकते हैं और संस्थानों के लिए अपनी प्रगति को मापने का एक आधार प्रदान कर सकते हैं।

13 टिप्पणि

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    chandra aja

    अगस्त 13, 2024 AT 10:01
    NIRF रैंकिंग? ये सब झूठ है। सिर्फ वो संस्थान ऊपर आते हैं जिनके पास गवर्नमेंट कनेक्शन है। आईआईटी वाले तो अपने बजट के हिसाब से रैंकिंग बनवा लेते हैं। किसी ने कभी गाँव के छोटे कॉलेज की रिपोर्ट देखी है? नहीं।
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    Sutirtha Bagchi

    अगस्त 14, 2024 AT 16:48
    ये सब बकवास है!! 😤 मैंने आईआईटी दिल्ली से पढ़ा और मेरी सैलरी तो एक छोटे शहर के कॉलेज से पढ़े दोस्त से कम है! क्या ये रैंकिंग हमारी जिंदगी बदल देगी? नहीं! 😒
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    Abhishek Deshpande

    अगस्त 15, 2024 AT 12:39
    मैंने इस रैंकिंग को डीटेल में चेक किया है... और ये बहुत अधूरी है... जैसे कि, अनुसंधान आउटपुट के लिए किसी भी संस्थान के रिसर्च पेपर्स की क्वालिटी को नहीं देखा गया है... और इसके अलावा, डॉक्टरेट के लिए डेटा भी गायब है... और यहाँ तक कि टीचिंग स्टाफ के क्वालिफिकेशन के बारे में भी कोई डिटेल नहीं है... ये तो बस एक शो है...
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    Saachi Sharma

    अगस्त 16, 2024 AT 17:06
    आईआईटी वाले जी तो अपनी रैंकिंग बनवाते हैं, बाकी सब बस फैलाव करते हैं 😏 अरे भाई, जब तक नौकरी मिल जाए, रैंकिंग क्या है? चलो बात बंद करो और काम करो।
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    shubham pawar

    अगस्त 16, 2024 AT 20:09
    मैं बस एक बात कहना चाहता हूँ... जब मैं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ता था, तो मैंने एक छोटी सी किताब लिखी थी... जिसे एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने अपने करिकुलम में डाल दिया... लेकिन इस रैंकिंग में वो नहीं आया... क्यों? क्योंकि वो गाँव के बाहर नहीं था... और जो बाहर था, वो बस एक नौकरी के लिए तैयार हो रहा था... नहीं, वो जीवन जी रहा था... 🌌
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    Nitin Srivastava

    अगस्त 17, 2024 AT 05:33
    NIRF 2024? ये तो बस एक ब्यूरोक्रेटिक फैंटेसी है। एक वास्तविक शिक्षा प्रणाली में, आपकी शिक्षा का मूल्य आपके द्वारा बनाए गए एक्सपेरिमेंट्स, आपके द्वारा बनाई गई टेक्नोलॉजी, और आपके द्वारा बदले गए जीवनों से मापा जाता है - न कि एक फॉर्म के फील्ड्स से। ये रैंकिंग तो एक डेटा फार्मेट है, जिसमें इंसान का कोई रोल नहीं। 🧠
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    Kaviya A

    अगस्त 18, 2024 AT 04:01
    kya yeh sab hai ye ranking toh bas ek jhooth hai maine apne dost ko dekha hai jo iit se graduate hua hai aur ab ek chai ki dukaan pe kaam kar raha hai aur ek private college ke student jo bhaiya ko bhi nahi pata tha ki nirf kya hai lekin ab ek startup chala raha hai jo 1000 logon ko kaam de raha hai
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    Supreet Grover

    अगस्त 19, 2024 AT 09:10
    The NIRF framework, while quantitatively robust, exhibits significant epistemic bias in its metric weighting - particularly in the over-representation of research output and institutional branding, while under-indexing pedagogical innovation and regional equity. A paradigm shift towards competency-based assessment is imperative for systemic integrity.
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    Saurabh Jain

    अगस्त 21, 2024 AT 05:47
    हमारी शिक्षा प्रणाली में बहुत सारे अच्छे छात्र हैं, जो गाँव के छोटे कॉलेज से आते हैं। उनके पास बिजली नहीं होती, लेकिन उनके पास इरादा होता है। रैंकिंग से पहले हमें उनकी कहानियाँ सुननी चाहिए। ये सिर्फ एक रैंकिंग नहीं, ये हमारी आत्मा की झलक है।
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    Suman Sourav Prasad

    अगस्त 22, 2024 AT 18:11
    मैंने भी एक बार आईआईटी बॉम्बे के एक प्रोफेसर से बात की थी, और उन्होंने कहा था - रैंकिंग के लिए डेटा भरने में जितना समय लगता है, उतना ही समय बच जाता अगर वो छात्रों के साथ बैठकर बात करते... ये सब बस एक रिपोर्ट है, जिसका कोई जीवन नहीं है।
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    Nupur Anand

    अगस्त 23, 2024 AT 17:30
    ये रैंकिंग तो एक नए तरह का वर्णव्यवस्था है। आईआईटी वाले ब्राह्मण हैं, आईएम वाले क्षत्रिय, जेएनयू वाले वैश्य, और बाकी सब शूद्र। इंसान का ज्ञान उसके संस्थान के नाम से नहीं, उसके विचारों से मापा जाना चाहिए। ये रैंकिंग नहीं, ये अपराध है।
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    Vivek Pujari

    अगस्त 24, 2024 AT 02:56
    NIRF 2024? 🤡 अगर आपका कॉलेज रैंकिंग में नहीं है, तो आपकी डिग्री का कोई मूल्य नहीं? अरे भाई, मैंने एक राज्य विश्वविद्यालय से पढ़ा और मैंने अपना खुद का एप बनाया - 500K डाउनलोड्स। लेकिन ये रैंकिंग मुझे दिखाती है कि मैं एक फेल हूँ? 😤
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    Ajay baindara

    अगस्त 25, 2024 AT 02:14
    ये सब झूठ है। जिन्होंने ये रैंकिंग बनाई है, उन्होंने कभी गाँव के कॉलेज में शिक्षा नहीं देखी। ये लोग बस अपनी नौकरी बचाने के लिए ये रैंकिंग बना रहे हैं। छात्रों को बहकाने के लिए। ये नहीं, ये बदमाशी है।

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