मंगलवार, 10 मार्च 2025 को दोपहर के लगभग 10:30 बजे, तनिष्क के अर्राह स्थित गोपाली चौक शोरूम पर आठ लोगों की एक सशस्त्र टोली ने एक धाकड़ लूट किया। लूट में सोने के हार, गले की चेन, बाली, हीरे और नकदी सहित कुल ₹25 करोड़ की जेवरात ले जाई गई। शोरूम के प्रबंधक कुमार मृत्युंजय ने बताया कि सोने की मात्रा हीरों से कहीं अधिक थी, और नकदी का अनुमान अभी तक नहीं लग पाया। घटना की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हो गई — जिसमें आठ-नौ आतंकी मास्क और हेलमेट पहने, दो मोटरसाइकिलों पर आए और ग्राहकों और कर्मचारियों को बंदूक से घेरकर हाथ ऊपर करने को कहा।
लूट का तरीका: ग्राहक बनकर घुसे
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने शोरूम के नियम का फायदा उठाया — एक बार में केवल चार ग्राहक ही अंदर जा सकते हैं। इसलिए पहले दो आतंकी अंदर गए, फिर चार और। जैसे ही शोरूम में भीड़ बढ़ी, बाकी तीन भी घुस गए। सुरक्षा गार्ड मनोज कुमार के अनुसार, उन्होंने अपनी राइफल छीन ली और उन्हें जोर से पीटा। सभी कर्मचारियों के मोबाइल भी जब्त कर लिए गए। दो शोरूम के अधिकारी भी बंदूक से सिर पर मारे गए।
पुलिस की देरी और आलोचना
लेकिन यहाँ सबसे बड़ी बात — पुलिस का जवाब देर से आया। अर्राह थाना केवल 700 मीटर दूर था। फिर भी, कर्मचारियों ने 25-30 बार पुलिस को फोन किया, लेकिन कोई नहीं आया। सिमरन, एक कर्मचारी, ने कहा, "हमने 112 भी डायल किया। पुलिस कहती रही कि आ रही है, लेकिन जब तक वे आए, चोर भाग चुके थे।" यह देरी ने स्थानीय लोगों में गुस्सा भर दिया। एक आम आदमी ने कहा, "अगर थाना इतना करीब है, तो ये लूट कैसे हो गई?"
पुलिस की कार्रवाई: दो गिरफ्तार, चार भागे
घटना के बाद तुरंत पुलिस ने एक बड़ी तलाशी शुरू की। दोपहर के बाद, अर्राह-बाबूरा रोड पर तीन संदिग्ध मोटरसाइकिलों को रोका गया। इनमें से दो आरोपी ने अपनी बाइक छोड़ दी और भागने की कोशिश की। जब पुलिस ने उनका पीछा किया, तो उन्होंने बंदूक चलाई। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी गोलीबारी की। दोनों आरोपी टांग में गोली लगने से घायल हो गए। उनसे दो बोरी जेवरात, दो पिस्टल, दस गोलियाँ और एक मोटरसाइकिल बरामद हुई। पुलिस ने बताया कि इन बोरियों में ₹15 करोड़ की जेवरात थी। लेकिन तीसरी बोरी गायब है — और चार आरोपी अभी भी फरार हैं।
विशेष जाँच टीम और CCTV का रोल
भोजपुर के एसपी राज ने घोषणा की कि एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की गई है। सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण चल रहा है, और आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी कर दी गई हैं। एसपी ने कहा, "हमने सभी भागने के रास्ते बंद कर दिए हैं। अगले 48 घंटों में बाकी चोरों को पकड़ लिया जाएगा।" उन्होंने यह भी बताया कि लूट के दौरान सुरक्षा गार्ड की राइफल भी ले ली गई है — जिसका इस्तेमाल अगले अपराधों में हो सकता है।
अतीत का अंधेरा: पहले भी हुआ था ऐसा ही हमला
यह लूट बिहार में ऐसी पहली घटना नहीं है। इससे कुछ दिन पहले, चुनमुन झा, 25 वर्षीय एक युवक, जिसे अर्राह के तनिष्क लूट में शामिल होने का आरोप था, को बिहार पुलिस की विशेष टास्क फोर्स ने अररिया के थल्हा नाले के पास एक एनकाउंटर में मार दिया। उसके खिलाफ भी उसी तरह का आरोप था — ग्राहक बनकर घुसना, गार्ड की राइफल छीनना, और जेवरात लूटना। लेकिन उस घटना में लूट की राशि ₹10 करोड़ बताई गई थी — जो इस बार के ₹25 करोड़ से कम है। क्या ये एक ही गिरोह है? या अलग-अलग टोलियाँ एक जैसे तरीके से काम कर रही हैं? यह अभी अनसुलझा सवाल है।
परिणाम: जनता का भरोसा टूटा
इस लूट ने बिहार के लोगों के भीतर एक गहरा आतंक पैदा कर दिया है। जेवरात की दुकानें अब दिन में भी बंद रहने लगी हैं। कई ग्राहक अब शोरूम में जाने से डर रहे हैं। "मैं अपनी बहू के लिए बरात के लिए जेवरात खरीदने गया था," एक वृद्ध ने कहा, "अब मैं नहीं जाऊँगा। क्योंकि अब ये लूट बहुत बड़े पैमाने पर हो रहे हैं।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तनिष्क शोरूम में लूट के बाद पुलिस क्यों देर से पहुँची?
अर्राह थाना शोरूम से केवल 700 मीटर दूर था, लेकिन कर्मचारियों ने 25-30 बार पुलिस को फोन किया और 112 भी डायल किया, फिर भी पुलिस 30 मिनट तक नहीं आई। एक अधिकारी ने बताया कि "अलर्ट सिस्टम ने तुरंत जवाब नहीं दिया" — जिसका मतलब है कि आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए नियम या तो नहीं थे या उनका पालन नहीं हो रहा था।
लूट के दौरान कितने आरोपी शामिल थे?
सीसीटीवी फुटेज में 5 से 9 आरोपी दिखाई देते हैं। पुलिस का मानना है कि आठ या नौ लोग शामिल थे। दो गिरफ्तार हो चुके हैं, चार अभी फरार हैं, और एक आरोपी चुनमुन झा को एनकाउंटर में मार दिया गया। अभी तक यह नहीं पता कि ये सभी एक ही गिरोह के हैं या अलग-अलग समूह हैं।
₹15 करोड़ की जेवरात कैसे बरामद हुई?
पुलिस ने अर्राह-बाबूरा रोड पर तीन मोटरसाइकिलों को रोका। दो आरोपी भागे, जिनके साथ दो बोरी जेवरात थीं। गोलीबारी के बाद उनसे बोरियाँ और हथियार बरामद हुए। बाकी की एक बोरी अभी तक नहीं मिली है — जिसमें लगभग ₹10 करोड़ की जेवरात हो सकती है।
इस लूट का क्या असर बिहार के व्यापार पर पड़ेगा?
तनिष्क जैसी बड़ी ब्रांड्स ने अब बिहार के अन्य शोरूम में सुरक्षा बढ़ा दी है। अन्य जेवरात की दुकानें भी अब दिन में भी बंद रह रही हैं। ग्राहकों का भरोसा टूट चुका है, जिससे बिहार में शुभ अवसरों पर जेवरात की बिक्री में 40% तक की गिरावट आ सकती है।
क्या यह लूट अतीत की घटनाओं से जुड़ी है?
हाँ। पिछले हफ्ते अररिया में चुनमुन झा की मौत हुई, जिसे अर्राह के तनिष्क लूट में शामिल होने का आरोप था। दोनों घटनाओं में तरीका एक जैसा है — मास्क पहनकर घुसना, गार्ड की राइफल छीनना, और दो मोटरसाइकिलों पर भागना। यह एक नए अपराधी नेटवर्क का संकेत हो सकता है।
अब तनिष्क क्या कर रहा है?
तनिष्क ने अर्राह शोरूम को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और सुरक्षा नियमों में सुधार किया है। अब शोरूम में एक अतिरिक्त सुरक्षा कर्मचारी रखा जाएगा, और सीसीटीवी कैमरों को रियल-टाइम पुलिस सेंटर से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, ग्राहकों के लिए एक अलग एंट्री और एक्सिट पॉइंट बनाया जा रहा है।
Sanket Sonar
नवंबर 24, 2025 AT 03:06ये लूट देखकर लगा जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म का सीन चल रहा हो। ग्राहक बनकर घुसना, गार्ड की राइफल छीनना, दो मोटरसाइकिलों पर भागना - ये सब तो एक्शन फिल्म में ही देखा है। पुलिस जो 700 मीटर दूर है, वो भी टीवी पर दिख रही थी ना?
pravin s
नवंबर 24, 2025 AT 22:31अगर थाना इतना करीब है तो ये लूट कैसे हो गई? ये सिर्फ एक घटना नहीं, ये सिस्टम का असफल होना है। अब तनिष्क भी अपनी सुरक्षा बढ़ाएगा, लेकिन आम आदमी के लिए जेवरात खरीदना अब एक जोखिम बन गया है।
Bharat Mewada
नवंबर 25, 2025 AT 11:29हम जब जेवरात खरीदते हैं, तो सिर्फ सोना नहीं खरीदते - हम भरोसा खरीदते हैं। अब वो भरोसा टूट गया है। एक दुकान की सुरक्षा नहीं, एक समाज की आत्मा की सुरक्षा की जरूरत है। क्या हम इतने डर के साथ जीने लगे हैं कि अपने घर के बाहर भी अपनी जिंदगी का एहसास नहीं हो पा रहा?
Ambika Dhal
नवंबर 25, 2025 AT 17:47अरे भाई, ये सब तो लोगों की आलसी आदतों का नतीजा है। लोग अपनी जेवरात घर में रखते हैं, लेकिन जब बरात होती है तो शोरूम में जाते हैं। फिर पुलिस को दोष देते हैं। अगर आप अपने जीवन की सुरक्षा खुद नहीं सोचते, तो किसी और को क्यों दोष देते हो?
Vaneet Goyal
नवंबर 27, 2025 AT 03:49सीसीटीवी फुटेज देखा है? आठ आतंकी, दो मोटरसाइकिलें, बंदूकें, हेलमेट, मास्क - और फिर भी पुलिस ने 30 मिनट तक इंतजार किया? ये नहीं, ये अपराधी नहीं, ये राज्य का अस्तित्व ही खत्म हो रहा है। ये सिर्फ लूट नहीं, ये आतंक है।
Amita Sinha
नवंबर 28, 2025 AT 17:09ये सब तो बस एक नए ट्रेंड की शुरुआत है 😭 अब तनिष्क जैसे ब्रांड्स भी बंद हो जाएंगे, फिर कहाँ जाएंगे हम अपने बरात के लिए? मैं तो अब सोने के घड़े खरीदने वाली हूँ, ना कि जेवरात! 💔
Vidushi Wahal
नवंबर 30, 2025 AT 02:33अर्राह में जब भी कुछ होता है, पुलिस देर से पहुँचती है। ये अब नियम बन गया है। लेकिन ये लूट तो बहुत बड़ी है - ₹25 करोड़? इतनी बड़ी रकम को ले जाने के लिए तो एक पूरा ऑपरेशन चल रहा होगा।
Narinder K
नवंबर 30, 2025 AT 12:39अरे भाई, अगर एक आतंकी बरात के लिए जेवरात लूट रहा है, तो दूसरा क्या कर रहा है? शायद अपनी बहन के लिए नकली चेन खरीद रहा है। 😏
Narayana Murthy Dasara
दिसंबर 1, 2025 AT 18:50ये सब लोग एक नए नेटवर्क के हिस्से हो सकते हैं। पिछले हफ्ते चुनमुन झा का एनकाउंटर और अब ये लूट - दोनों में तरीका बिल्कुल एक जैसा। शायद ये बिहार के अंदर एक नया अपराधी गिरोह बन रहा है। अगर पुलिस इसे एक नेटवर्क के रूप में देखे, तो बाकी चार भी पकड़ लिए जाएंगे।
lakshmi shyam
दिसंबर 2, 2025 AT 05:59तनिष्क को अपनी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए थी। ये लूट तो बिल्कुल अनिवार्य थी - इतनी आसानी से घुस जाना, गार्ड की राइफल छीनना, और फिर भाग जाना। ये तो लोगों को सिखाने के लिए बनाया गया है कि जेवरात की दुकानें बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।
Sabir Malik
दिसंबर 4, 2025 AT 00:09मैंने अपने दोस्त को एक बार अर्राह में तनिष्क के बारे में सुना था - वो कहता था कि वहाँ जाने से पहले वो अपनी बहन को बताता था कि वो कहाँ जा रहा है। अब ये लूट हुई है, तो अब तो हर कोई अपने घर के बाहर भी डर रहा है। मैं जानता हूँ कि ये सिर्फ एक लूट नहीं है - ये एक समाज की आत्मा को चोट पहुँचा रहा है। हमें अपने आप को सुरक्षित महसूस करना होगा। हमें एक दूसरे के साथ जुड़ना होगा।
Vasudha Kamra
दिसंबर 5, 2025 AT 07:53लूट के दौरान सुरक्षा गार्ड ने अपनी राइफल छीन ली और आरोपियों को पीटा - यह बहुत बहादुरी का काम है। लेकिन इसके बावजूद भी लूट हो गई। इसका मतलब है कि व्यक्तिगत बहादुरी काफी नहीं है - सिस्टम को सुधारना होगा।
Abhinav Rawat
दिसंबर 7, 2025 AT 07:53एक दिन बिहार की इतिहास की किताबों में ये लूट एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होगी - जब एक जेवरात की दुकान ने एक पूरे राज्य के भरोसे को तोड़ दिया। ये सिर्फ एक लूट नहीं है, ये एक सामाजिक विघटन का संकेत है। जब लोग अपने घर के बाहर भी अपनी जिंदगी के लिए डरने लगें, तो वहाँ आजादी का क्या मतलब है? हम जो आज देख रहे हैं, वह भविष्य का एक बड़ा अंधेरा है।
Shashi Singh
दिसंबर 7, 2025 AT 16:34ये लूट असल में एक राजनीतिक षड्यंत्र है! सीसीटीवी फुटेज को बदल दिया गया है - जिसमें आरोपी दिख रहे हैं, वो असल में एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी संगठन के हैं, जो बिहार में अपना नेटवर्क बना रहे हैं! और वो दो गिरफ्तार आरोपी? उन्हें बर्बर तरीके से पकड़ा गया है - वो बस गुमशुदा लोग हैं! ये लूट बिहार के राज्य के खिलाफ एक जासूसी ऑपरेशन है - और जो बाकी चार फरार हैं, वो अभी एक नए गुप्त बैंक में जेवरात बेच रहे हैं - जो अमेरिका के एक गुप्त अधिकारी के नाम पर है!
Surbhi Kanda
दिसंबर 7, 2025 AT 23:38तनिष्क के शोरूम में एक अतिरिक्त सुरक्षा कर्मचारी रखना और सीसीटीवी को पुलिस सेंटर से जोड़ना - ये सब बहुत अच्छा है। लेकिन अगर ग्राहकों को एक अलग एंट्री और एक्सिट दिया जाए, तो लूट का खतरा कम होगा। ये एक बुनियादी सुरक्षा योजना है - और इसे अब तक नहीं किया गया था।