TDS क्या है? आसान शब्दों में समझें
जब भी कोई कंपनी या व्यक्ति आपके ऊपर भुगतान करता है, तो अक्सर वह राशि का एक हिस्सा सरकार को काट लेता है। इसे ही हम टैक्स डिडकटेड एट सोर्स (TDS) कहते हैं। यानी पैसा मिलने से पहले ही कटौती हो जाती है और बाकी आपको मिलती है। यह तरीका सरकार के लिए टैक्स कलेक्शन आसान बनाता है और आपके लिए भी फॉर्म भरने की झंझट कम करता है।
TDS कब, कैसे और किस दर से लगता है?
हर तरह का भुगतान पर TDS नहीं लगता, लेकिन कुछ ख़ास स्थितियों में यह अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर वेतन, किराया, पेशेवर शुल्क, ब्याज, कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट आदि पर लागू होता है। दरें अलग-अलग हो सकती हैं – जैसे वेतन पर 10%, किराए पर 5% या बैंक इंटरेस्ट पर 10%। सरकार हर साल इन दरों को अपडेट करती है, इसलिए नवीनतम नियम देखना ज़रूरी है।
यदि आप फ्रीलांस काम करते हैं तो आपके क्लाइंट आपको invoice भेजेंगे और उस पर TDS काट कर सरकार को जमा करेंगे। आपका नेट इनकम कम दिखेगा लेकिन साल के अंत में आप इसे टैक्स रिटर्न में दाखिल करके कुछ रकम वापस पा सकते हैं, अगर आपकी कुल आय टैक्स स्लैब से नीचे है।
TDS रिटर्न कैसे फाइल करें?
हर वित्तीय वर्ष में एक बार आपको TDS रिटर्न भरना पड़ता है। इसके लिए सबसे पहले Form 26AS डाउनलोड करें – यह आपका टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है जिसमें सभी कटौतियाँ दिखती हैं। फिर आयकर पोर्टल पर लॉगिन करके आवश्यक फॉर्म (जैसे 24Q, 27Q) चुनें और सही डेटा डालें। ध्यान रहे कि भुगतान करने वाले का PAN और आपके PAN दोनों सही हों, नहीं तो रिटर्न एरर देगा।
फ़ाइलिंग के बाद आपको एक acknowledgment number मिलेगा। इस नंबर को सुरक्षित रखें क्योंकि भविष्य में कोई भी सवाल या क्लेम करने के लिये यही काम आएगा। अगर आपने ज्यादा टैक्स काटवाया है तो आयकर रिटर्न में उसका दावा कर सकते हैं, और अगर कम लगा हो तो अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।
कभी‑कभी छोटे-छोटे भूलें बड़ी परेशानी बन जाती हैं – जैसे PAN नहीं देना या गलत फ़ॉर्म भरना। ऐसी स्थिति में तुरंत पोर्टल पर जाकर संशोधन (revised return) करें, देर न करने से जुर्माना बचता है।
तो अब जब आप TDS की बुनियादी बातों को समझ गए हैं, तो अपनी आय के स्रोतों को नोट करें और देखिए कहाँ‑कहाँ कटौती हो रही है। अगर आपके पास कोई खास सवाल या केस है, तो नीचे कमेंट में पूछें – हम जवाब देंगे। याद रखें, सही जानकारी और समय पर फाइलिंग से टैक्स की चिंता घटती है और आपका वित्तीय जीवन आसान बनता है।

वित्तीय बजट 2024: म्यूचुअल फंड्स और UTI में रिपर्चेज पर 20% TDS हटाया गया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय बजट 2024 में म्यूचुअल फंड्स और UTI में रिपर्चेज पर 20% TDS को हटाने की घोषणा की है। वित्त विधेयक 2024 में आयकर अधिनियम की धारा 194F को हटाया गया है, जो पहले म्यूचुअल फंड्स और UTI को भुगतान पर 20% कर कटौती की आवश्यकता होती थी। यह बदलाव 1 अक्टूबर 2024 से लागू होगा। इस कदम का उद्देश्य म्यूचुअल फंड्स और UTI में निवेश को बढ़ावा देना है।
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