सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स: क्या बदल रहा है और आपको कैसे बचना चाहिए

अगर आप शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो सिक्योरिटी ट्रांजेक्टन टैक्स (STT) आपके पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाता है। यह टैक्स हर खरीदी‑बेची पर लगती है और सरकार को बाजार की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बनाया गया था। लेकिन हाल ही में नियमों में बदलाव आया है, जिससे कई निवेशकों को आश्चर्य हुआ है। चलिए समझते हैं कि नई दरें क्या हैं और आप अपने खर्चे कैसे कम कर सकते हैं।

नए STT नियम – कौन सी दरें लागू हुईं?

2024 के बजट में बताया गया कि इक्विटी डील्स पर 0.1% की दर बनी रहेगी, लेकिन डेरिवेटिव और फ्यूचर‑ऑप्शन ट्रेडिंग पर अब 0.025% से 0.05% तक की सीमा रखी गई है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप दिन‑प्रतिदिन बहुत सारे लॉट्स खरीदते‑बेचते हैं तो टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। वहीं, म्यूचुअल फंड के यूनिट ट्रांसफ़र पर अब 0.015% से 0.03% की दर तय हुई है। ये परिवर्तन छोटे निवेशकों को ज्यादा प्रभावित करेंगे क्योंकि उनके लेन‑देन आकार छोटा होता है।

टैक्स बचाव के आसान टिप्स

पहला कदम – दीर्घकालिक होल्डिंग रखें। अगर आप शेयर दो साल से अधिक समय तक रखते हैं तो STT के बाद मिलने वाले कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिलती है, जिससे कुल टैक्स बोझ घटता है। दूसरा – ट्रेडिंग की आवृत्ति कम करें। बार‑बार खरीद‑बेच करने से STT कई बार लगता है; एक ही शेयर को कुछ हफ्तों या महीनों के अंतराल पर खरीदना बेहतर रहता है। तीसरा – डेरिवेटिव में निवेश करते समय लॉट साइज का ध्यान रखें। छोटे लॉट्स पर वही दर लागू होती है, इसलिए बड़े लॉट्स चुनने से प्रति यूनिट टैक्स घट सकता है। चौथा – म्यूचुअल फंड के SIP (Systematic Investment Plan) को प्राथमिकता दें; इसमें STT की दर कम रहती है और आप मार्केट टाइमिंग के जोखिम से बचते हैं। पाँचवा टिप – टैक्स रिफंड या छूट वाले पोर्टफोलियो पर नज़र रखें, जैसे कि ELSS फ़ंड जहाँ टैक्स डिडक्टिबल होता है।

इन तरीकों को अपनाने से आपका निवेश अधिक लाभदायक बन सकता है और सरकार को भी सही राजस्व मिलता रहेगा। याद रखें, टैक्स बचाव का मतलब टैक़्स चोरी नहीं, बल्कि नियमों के अंदर रहकर अपनी लागत घटाना है। अगर आप अभी भी उलझन में हैं तो अपने ब्रोकर या वित्तीय सलाहकार से मिलें; वे आपके पोर्टफोलियो को विश्लेषित करके व्यक्तिगत योजना बना सकते हैं।

आखिर में, STT का लक्ष्य बाजार की पारदर्शिता बढ़ाना और अवैध ट्रेडिंग रोकना है। इसलिए इस टैक्स को समझकर ही निवेश करना चाहिए, न कि डर से पीछे हटना चाहिए। सही जानकारी और स्मार्ट रणनीति आपके पैसे को सुरक्षित रखेगी, चाहे बाजार उछाल में हो या गिरावट में।

शेयर बाज़ार में सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए SEBI के प्रस्ताव, बढ़ी सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स

शेयर बाज़ार में सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए SEBI के प्रस्ताव, बढ़ी सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इंडेक्स डेरिवेटिव्स खंड में सट्टा गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए कई उपायों का प्रस्ताव दिया है। इनमें अनुबंध आकार बढ़ाना, साप्ताहिक उत्पादों को सीमित करना और ब्रोकर्स को विकल्प प्रीमियम अग्रिम में एकत्र करना शामिल है। इसके अलावा, सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडों पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया है।

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