शपथ ग्रहण का महत्व और क्या होता है?
क्या आप जानते हैं कि हर साल भारत में हजारों शपथ ग्रहण होते हैं? चाहे वह राज्य सभा का सदस्य हो या नया प्रधानमंत्री, इस क्षण पर सबकी नज़रें टिकी होती हैं। शपथ सिर्फ कागज़ी प्रक्रिया नहीं, ये नई शुरुआत की निशानी है। जब कोई नेता अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता है, तो जनता भी उसे देखती है कि क्या वो भरोसा रखेगा।
शपथ ग्रहण के मुख्य चरण
एक सामान्य शपथ समारोह में तीन चीज़ें होती हैं – तैयारियों का माहौल, शपथ लेनी वाली किताब और गवाही देने वाले गवाह। सबसे पहले मंच सजाया जाता है, राष्ट्रीय ध्वज झण्डा फहराया जाता है और देशभक्तिपूर्ण संगीत बजता है। फिर अधिकारी (अधिकतर राष्ट्रपति या राज्यपाल) शपथ पुस्तक पेश करते हैं। नेता को हाथ में पुस्तक लेकर "मैं भारत की सच्ची सेवा करूँगा/करूँगी" जैसी पंक्तियों पर दोबारा शब्दों का उच्चारण करना होता है। अंत में सभी उपस्थित लोग तालियाँ बजाते हुए इस नई जिम्मेदारी को स्वीकारते हैं।
ऐतिहासिक शपथ ग्रहण के कुछ यादगार पल
जब 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तो टीवी पर हर घर में उनका चेहरा दिखता था। उसी तरह 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का शपथ ग्रहण भी कई लोगों के लिए खास रहा – वह पहली बार महिला राष्ट्रपति बनीं और उनके शब्दों को सुनकर महिलाओं में नई आशा जगी। इन घटनाओं ने सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक मनोभावों पर भी असर डाला।
हाल ही में कुछ राज्यसभा सदस्यों की शपथ भी बड़ी चर्चा का कारण बना। जब युवा नेताओं ने अपने वचन को स्पष्ट किया कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर काम करेंगे, तो सोशल मीडिया पर उनका समर्थन बढ़ा। इस तरह से शपथ केवल औपचारिक नहीं, बल्कि जनता के साथ एक जुड़ाव बन जाती है।
अगर आप किसी नई सरकार का इंतजार कर रहे हैं या अपने स्थानीय प्रतिनिधियों की शपथ देखना चाहते हैं, तो ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग एक आसान विकल्प है। कई चैनल जैसे DD News, ABP News और YouTube पर सीधे प्रसारण किया जाता है। इस तरह से आप बिना दूर जाएँ, वास्तविक समय में सभी विवरण देख सकते हैं।
शपथ ग्रहण का असर सिर्फ राजनैतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक भी होता है। जब नई सरकार की शपथ ली जाती है, तो अक्सर शेयर बाजार में हलचल देखी जाती है – निवेशक यह जानना चाहते हैं कि नयी नीति कैसे बनेगी। इसलिए इस दिन को कई कंपनियां और बैंक्स भी बड़ी धूमधाम से देखते हैं।
अंत में एक बात याद रखें – शपथ सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि कार्य का वादा है। चाहे वह राष्ट्रीय स्तर पर हो या स्थानीय, हर शपथ के पीछे जनता की उम्मीदें छिपी होती हैं। इसलिए जब अगली बार आप किसी नेता को शपथ लेते देखें, तो उसकी बातें सुनिए और देखिये कि क्या वो अपने वादे निभा पाएंगे। यही भारत में शपथ ग्रहण का असली मतलब है – नई शुरुआत, नई आशा, और सबके लिए एक बेहतर भविष्य की दिशा।

भारतरुहारी महताब ने 18वीं लोकसभा के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में शपथ ली
सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सात बार के सांसद और भाजपा सदस्य भारतरुहारी महताब को नई गठित 18वीं लोकसभा के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में शपथ दिलाई। महताब और उनके साथ अध्यक्षों के एक पैनल को सोमवार और मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है क्योंकि विजेता उम्मीदवार 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।
श्रेणियाँ: राजनीति
0