म्यूचुअल फ़ंड्स क्या हैं? सरल भाषा में समझिए
अगर आप अपने पैसे को बढ़ाने की सोच रहे हैं लेकिन स्टॉक्स या बॉण्ड्स की जटिलता से बचना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड्स आपके लिये एक आसान रास्ता है। यह एक ऐसी योजना है जहाँ बहुत सारे लोग अपना पैसा मिलाकर प्रोफेशनल मैनेजर के पास जमा कराते हैं और वह आपका पैसा विभिन्न शेयर, बॉण्ड या अन्य सिक्योरिटीज़ में निवेश करता है। आप खुद नहीं चुनते कि कौन‑सी कंपनी में कितना पैसे लगाएँ; फंड का मैनेजर वो काम आपके लिये करता है।
मुख्य प्रकार के म्यूचुअल फ़ंड्स और उन्हें कैसे चुने
फ़ंड कई तरह के होते हैं, पर सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले तीन प्रकार हैं – इक्विटी फंड, डेट फंड और हाइब्रिड (मिश्रित) फंड। इक्विटी फंड शेयरों में निवेश करता है, इसलिए रिस्क हाई लेकिन रिटर्न भी बेहतर हो सकता है। अगर आप लंबी अवधि के लिये सोच रहे हैं तो ये उपयुक्त है। डेट फंड बांड और सरकारी सिक्योरिटीज़ में लगते हैं – कम जोखिम, स्थिर रिटर्न। हाइब्रिड फ़ंड दोनों का मिश्रण होते हैं, जो रिस्क को थोड़ा कम रखकर भी अच्छा रिटर्न देने की कोशिश करते हैं।
फ़ंड चुनते समय अपने निवेश लक्ष्य, टाइमलाइन और रिस्क सहनशीलता पर ध्यान दें। अगर आप 5‑10 साल तक पैसा नहीं निकालने वाले हैं तो इक्विटी या हाइब्रिड फंड बेहतर रहेगा। छोटा‑छोटा टारगेट जैसे घर का डाउन पेमेंट या बच्चों की शिक्षा के लिये डेट फ़ंड सुरक्षित विकल्प हो सकता है। हमेशा फ़ंड का ऐतिहासिक रिटर्न, एसेट अलोकेशन और खर्चे (एक्स्पेंस Ratio) देखें – कम खर्च वाले फंड लंबी अवधि में ज्यादा फायदा देते हैं।
SIP से निवेश कैसे शुरू करें: आसान कदम
सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) म्युचुअल फ़ंड्स का सबसे लोकप्रिय तरीका है क्योंकि इसमें आप हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम डालते हैं। इससे बड़े निवेश की जरूरत नहीं पड़ती और मार्केट के उतार‑चढ़ाव को भी कम किया जा सकता है। SIP शुरू करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:
- 1. एक भरोसेमंद फ़ंड हाउस या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म चुनें – जैसे वैरू, एंजेल ब्रोकर आदि।
- 2. अपना लक्ष्य तय करो – बचत के लिये कितना चाहिए और कब तक?
- 3. फंड का चयन करें (इक्विटी/डेट/हाइब्रिड) और राशि निर्धारित करें। आम तौर पर 5000‑10000 रुपये से शुरू कर सकते हैं।
- 4. बैंक अकाउंट लिंक करो, ऑटो डेबिट सेट अप करो – हर महीने की तारीख तय करके पैसा अपने आप कट जाता है।
- 5. नियमित रूप से फ़ंड स्टेटमेंट देखो और जरूरत पड़े तो योजना बदलो।
SIP का फायदा यह भी है कि जब मार्केट गिरता है, तब आपकी खरीद क्षमता बढ़ जाती है – इसे ‘रूजिंग एवरेज़’ कहते हैं। इसलिए लम्बे समय तक लगातार निवेश करने से आप अच्छे रिटर्न पा सकते हैं।
अंत में याद रखें, म्युचुअल फ़ंड्स किसी भी उम्र के लिये उपयुक्त हो सकते हैं अगर आप अपना लक्ष्य स्पष्ट रखते हों और सही फंड चुनें। थोड़ी‑सी जानकारी और नियमित योगदान से आपके पैसे को बढ़ने का मौका मिल जाता है। तो आज ही एक छोटा कदम उठाएँ – ऑनलाइन अकाउंट खोलें, अपने लिए सबसे सही फ़ंड चुनें और SIP शुरू करके अपनी बचत यात्रा को तेज़ बनाएं।

वित्तीय बजट 2024: म्यूचुअल फंड्स और UTI में रिपर्चेज पर 20% TDS हटाया गया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय बजट 2024 में म्यूचुअल फंड्स और UTI में रिपर्चेज पर 20% TDS को हटाने की घोषणा की है। वित्त विधेयक 2024 में आयकर अधिनियम की धारा 194F को हटाया गया है, जो पहले म्यूचुअल फंड्स और UTI को भुगतान पर 20% कर कटौती की आवश्यकता होती थी। यह बदलाव 1 अक्टूबर 2024 से लागू होगा। इस कदम का उद्देश्य म्यूचुअल फंड्स और UTI में निवेश को बढ़ावा देना है।
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