लूट
जब कोई व्यक्ति या समूह बल या डर का इस्तेमाल करके किसी की संपत्ति छीन लेता है, तो उसे लूट, किसी की संपत्ति को बलपूर्वक छीनने का अपराध कहते हैं। ये सिर्फ घर या बैंक तक सीमित नहीं है—लूट का मतलब हो सकता है राजनीतिक निर्णयों का दुरुपयोग, सरकारी धन का अपहरण, या फिर चुनावी अवसरों का नियंत्रण। भारत में लूट का अर्थ कभी-कभी सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि शक्ति के दुरुपयोग के रूप में भी होता है।
कानून के मुताबिक, लूट एक गंभीर अपराध है जिसकी सजा 7 साल तक की जेल हो सकती है। लेकिन असली सवाल ये है कि जब लूट का आरोप किसी व्यक्ति पर लगता है, तो उसका असली अर्थ क्या होता है? क्या ये एक छोटे चोर का काम है जो बैग छीन रहा है? या फिर कोई बड़ा नेता जो राज्य के धन को अपने खाते में डाल रहा है? बिहार चुनाव 2025, एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम जहाँ लूट के आरोप आम बात बन गए। जब अमित शाह कहते हैं कि "हर बिहारी की जीत है", तो क्या उनका मतलब सिर्फ वोट है? या फिर ये भी कहना है कि चुनाव के बाद जो धन बर्बाद हुआ, वो अब एनडीए के नेताओं के लिए बन गया?
लूट का एक और रूप है—राजनीतिक री-एलाइनमेंट, जब शक्ति के आधार को बदलकर नियंत्रण बनाया जाता है। ये वो जगह है जहाँ लूट का नाम बदल जाता है—"निवेश", "विकास", या "प्रबंधन"। जब BCCI स्टैंडबाय खिलाड़ियों को दुबई से बाहर कर देता है, तो क्या ये लूट है? जब LG का IPO खुलता है और पहले दिन सिर्फ 0.17x सब्सक्रिप्शन मिलता है, तो क्या ये निवेशकों के धन की लूट है? ये सवाल आपको अपने आसपास की दुनिया में पूछने के लिए मजबूर करते हैं।
लूट का असली दर्द ये है कि इसका एक नाम है, लेकिन कई चेहरे। ये एक आदमी की बैग छीनने वाली चोरी हो सकती है, या फिर एक सरकार का निर्णय जो लाखों के नुकसान का कारण बन गया। यहाँ आपको ऐसे ही मामले मिलेंगे—जहाँ लूट का नाम नहीं, लेकिन असर है। कुछ लूट आँखों के सामने होती है, कुछ फाइलों में छिपी होती है। ये सभी खबरें आपको बताएंगी कि लूट कहाँ हो रही है, और कौन उसके आगे खड़ा है।
बिहार के अर्राह में तनिष्क शोरूम पर हमला: 25 करोड़ की जेवरात लूट, दो गिरफ्तार
बिहार के अर्राह में तनिष्क शोरूम पर हमले में ₹25 करोड़ की जेवरात लूटी गई, जिसमें दो आरोपी गिरफ्तार और चार फरार हैं। पुलिस की देरी और सुरक्षा नियमों की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
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