LBW विवाद – क्रिकेट के सबसे गर्म बहस वाले पहलू

जब भी कोई बल्लेबाज़ लेग बिफोर विकेट (LBW) से बाहर हो जाता है, अक्सर स्टेडियम में हलचल मच जाती है। फैंस, खिलाड़ी और अंपायर सब इस पर अपनी-अपनी राय रखते हैं। तो चलिए, इस वादे के पीछे की वजहों को आसान शब्दों में समझते हैं, ताकि अगली बार आप भी अपने दोस्तों को सही जवाब दे सकें।

LBW के मूल नियम और क्यों बनता है विवाद

सबसे पहले जान लें कि LBW का मतलब है ‘लेग बिफोर विकेट’। अगर गेंद बल्लेबाज़ की पिच पर बिना बैट से टकराए, उसके पैर (या शिन) को मार लेती है और आगे के डिफेंडिंग लाइन में हो तो अंपायर उसे आउट कर सकता है। लेकिन यहाँ पाँच चीज़ें ध्यान देने लायक हैं:

  • पिच पर बॉल का पथ: गेंद किस दिशा से आ रही थी? अगर वह बाहर की ओर जा रही थी, तो अक्सर ‘नो‑वेट’ कहा जाता है.
  • इम्पैक्ट पॉइंट: बॉल कहाँ लगी? यदि पिच के नीचे या बहुत ऊपर लगी हो तो आउट नहीं माना जाता.
  • डिफेंडिंग लाइन: क्या बल्लेबाज़ ने बैट को सही दिशा में रखा था? अगर वह ‘वाइल्ड स्ट्रीक’ पर है, तो अंपायर अक्सर बाहर नहीं देता.
  • दूरी (स्टम्पिंग): बॉल को पिच के पीछे या बहुत आगे नहीं होना चाहिए – ये भी आउट/नॉट‑आउट का कारण बनता है.
  • ड्राईविंग टेक्नोलॉजी: DRS, हाउली‑हैक आदि मदद कर सकते हैं, लेकिन सभी टूर में नहीं होते. इसलिए अक्सर अंपायर की नजर ही फैसला तय करती है.

इन सब कारणों से हर बार समान स्थिति में अलग‑अलग निर्णय हो सकता है – यही LBW विवाद का मुख्य कारण है।

आधुनिक समय के प्रमुख LBW केस और उनसे मिली सीख

पिछले कुछ सालों में कई बड़े मैचों में LBW पर बहस हुई। 2023 क्रिकेट विश्व कप में एक फाइनल ओवर में बॉलिंग टीम ने ‘बोल्ड’ डायलॉग बनाया – बल्लेबाज़ का पैर पहले से ही पिच के बाहर था, लेकिन अंपायर ने आउट कर दिया. बाद में रेप्ले दिखाने पर पता चला कि इम्पैक्ट पॉइंट बहुत ऊपर थी, इसलिए फैंस ने ‘नॉट‑आउट’ कहा। इस केस ने बताया कि तकनीक की कमी वाले मैचों में अंपायर को ज्यादा दबाव झेलना पड़ता है.

एक और यादगार घटना 2022 IPL में हुई जब एक तेज़ बॉल रॉबर्टो का पैर लगा, लेकिन स्क्रीन पर दिखा कि वह ‘वाइल्ड स्ट्राइक’ के बाहर था. फिर भी आउट घोषित हुआ. यह केस बताता है कि अंपायर को हमेशा अपने फील्ड व्यू और तकनीक दोनों पर भरोसा करना चाहिए.

इन उदाहरणों से दो बात स्पष्ट होती हैं: पहला, खिलाड़ी को अपनी पोजिशनिंग बेहतर करनी चाहिए – बैट के साथ पैर भी सही जगह रखें. दूसरा, अंपायर को डीआरएस जैसे टूल्स की उपलब्धता और उनका उपयोग समझना जरूरी है। अगर दोनों पक्ष इन चीज़ों का ध्यान रखे तो भविष्य में कम वादे होंगे.

तो अगली बार जब आप किसी मैच में LBW देखेंगे, तो सिर्फ ‘आउट या नॉट‑ऑफ़’ नहीं, बल्कि ऊपर बताई गई पाँच बातों को याद रखें। इससे आपको समझ आएगा कि निर्णय क्यों आया और क्या यह सही था।

LBW विवाद एक छोटा हिस्सा है क्रिकेट की बड़ी दुनिया का, लेकिन इसको समझने से आप खेल के हर पहलू में गहरी नज़र रख पाएंगे। अब जब भी कोई बॉल लेग को छूए, तो खुद पूछें – पिच, इम्पैक्ट पॉइंट, डिफेंडिंग लाइन और टेक्नोलॉजी ने क्या कहा? यही तरीका है सच्चा फैन बनने का.

इंडिया ए बनाम इंग्लैंड लॉयन्स: जेसवाल के LBW फैसले पर बवाल, DRS न होने से बढ़ा विवाद

इंडिया ए बनाम इंग्लैंड लॉयन्स: जेसवाल के LBW फैसले पर बवाल, DRS न होने से बढ़ा विवाद

इंडिया ए और इंग्लैंड लॉयन्स के दूसरे अनौपचारिक टेस्ट में यशस्वी जैसवाल को LBW आउट दिए जाने पर मैदान पर विवाद छिड़ गया। जैसवाल ने फैसले से असहमति जताई, लेकिन DRS सिस्टम की गैरमौजूदगी में अंपायर का फैसला कायम रहा। इस घटना ने युवा बल्लेबाज की जज्बे और टेस्ट टीम में जगह के लिए उनकी अहमियत को उजागर किया।

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श्रेणियाँ: खेल

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