इंडेक्स डेरिवेटिव्स क्या हैं? आसान समझ

जब हम शेयर या कमोडिटी की बात करते हैं, तो अक्सर सुनते हैं ‘डेरिवेटिव्स’। ये वो टूल हैं जो आपको एक इंडेक्स (जैसे NIFTY 50) के भविष्य के मूल्य पर सट्टा लगाने की सुविधा देते हैं। असली में, आप खुद स्टॉक्स नहीं खरीद रहे होते, बल्कि उनकी कीमतों से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट को ट्रेड कर रहे होते हैं। इस कारण आपका पूँजी कम लगती है और लवलेवल ज्यादा रहता है।

फ्यूचर और ऑप्शन के बीच मूल अंतर

फ़्यूचर एक ऐसा समझौता है जहाँ दोनों पक्ष तय करते हैं कि भविष्य में इंडेक्स को कितनी कीमत पर खरीदेंगे या बेचेंगे। इसका मतलब, अगर बाजार आपके खिलाफ चलता है तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है, लेकिन साथ ही बड़ा फायदा भी मिल सकता है। ऑप्शन में दो तरह के अधिकार होते हैं – ‘कॉल’ (खरीदने का) और ‘पुट’ (बेचने का)। आप केवल प्रीमियम नामक छोटा भुगतान करके इन अधिकारों को खरीदते हैं, इसलिए नुकसान सीमित रहता है।

इंडेक्स डेरिवेटिव्स को निवेश में कैसे इस्तेमाल करें?

पहले तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है – मार्केट के ऊपर/नीचे सट्टा लगाना या पोर्टफ़ोलियो की सुरक्षा करना। अगर आप बुलिश (बाजार बढ़ेगा) सोचते हैं, तो फ़्यूचर लॉन्ग पोजीशन या कॉल ऑप्शन खरीद सकते हैं। बेयरिश (बाजार गिरेगा) होने पर शॉर्ट फ़्यूचर या पुट ऑप्शन बेहतर रहेंगे। दूसरा तरीका है हेजिंग – अपने स्टॉक पोज़िशन को डेरिवेटिव्स से बचाव करना, जैसे कि NIFTY के पुट खरीदकर डाउनसाइड रिस्क कम करें।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में लीवरेज का मतलब है छोटा पैसा लेकर बड़ी एंट्री करना। यह आकर्षक लगता है, पर सावधान रहें – बाजार थोड़ा भी उल्टा चल गया तो नुकसान तेज़ी से बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा स्टॉप‑लॉस सेट करें और पोज़िशन साइज को अपने पूँजी के 5-10% तक रखें।

एक अच्छी रणनीति बनाते समय पिछले डेटा देखें, लेकिन याद रखिए कि भविष्य की कीमतें केवल अनुमान हैं। इंडेक्स में बड़े खिलाड़ी (इंस्टीट्यूशन) अक्सर बड़ी मात्रा में ट्रेड करते हैं, इसलिए उनके मूवमेंट को समझना जरूरी है। तकनीकी चार्ट, वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट जैसे संकेतकों से आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

अंत में, डेरिवेटिव्स सीखने का सबसे आसान तरीका है पेपर ट्रेडिंग – असली पैसे के बिना प्रैक्टिस करें। इससे आप अपने एरर्स को समझ पाएँगे और वास्तविक ट्रेड में कम गलतियां करेंगे। जब आत्मविश्वास बढ़े तो धीरे‑धीरे छोटे साइज से शुरू करके अनुभव जमा करें।

संक्षेप में, इंडेक्स डेरिवेटिव्स आपको मार्केट की दिशा पर दांव लगाने या पोर्टफ़ोलियो को सुरक्षित करने का लचीलापन देते हैं। सही ज्ञान और जोखिम प्रबंधन के साथ आप इस टूल से बेहतर रिटर्न बना सकते हैं।

शेयर बाज़ार में सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए SEBI के प्रस्ताव, बढ़ी सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स

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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इंडेक्स डेरिवेटिव्स खंड में सट्टा गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए कई उपायों का प्रस्ताव दिया है। इनमें अनुबंध आकार बढ़ाना, साप्ताहिक उत्पादों को सीमित करना और ब्रोकर्स को विकल्प प्रीमियम अग्रिम में एकत्र करना शामिल है। इसके अलावा, सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडों पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया है।

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