भारत के ध्वजवाहक – क्यों है उनका महत्व?

जब भी भारत विदेश में या देश में कोई बड़ा खेल इवेंट होता है, सबसे पहले जो नजर आता है वह है ध्वजधारी. वही व्यक्ति हमारे राष्ट्रीय गर्व को दुनिया के सामने लाता है। लेकिन ध्वजवाहक बनना सिर्फ एक औपचारिक काम नहीं; यह सम्मान, जिम्मेदारी और प्रेरणा का मिश्रण है.

इतिहास में देखा जाए तो 1948 की ऑलिंपिक से ही भारत ने अपने प्रथम ध्वजवाहक को चुनकर बड़ा कदम रखा था. तब के फुटबॉलर सुब्रमण्यम स्वामी ने वह काम संभाला और देशभक्ति की नई लहर शुरू हुई. हर बाद में, चाहे वह एशियन गेम्स हो या Commonwealth Games, भारत का ध्वजधारी अक्सर वही होते हैं जिन्होंने अपने खेल में शीर्ष स्थान हासिल किया हो.

ध्वजवाहक चुनने के मानदंड

सिर्फ टॉप परफॉर्मर ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व भी मायने रखता है. चयन समिति देखती है कि खिलाड़ी ने कितना अनुशासन दिखाया है, क्या उसने समाज में सकारात्मक प्रभाव डाला है और क्या वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को अच्छे से पेश कर सकता है. यही कारण है कि कभी‑कभी एक अनुभवी खिलाड़ी, जैसे महेंद्र सिंह धोनी, को भी ध्वजवाहक बनाया जाता है – सिर्फ उनके खेल नहीं, बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता के लिए.

हालिया ओलंपिक में विराट कोहली और साक्षी मल्होत्रा जैसे नाम ध्वजधारी बनकर दिखे. उनका चयन युवा पीढ़ी के लिये एक बड़ी प्रेरणा रहा, क्योंकि दोनों ने न सिर्फ अपने‑अपने खेल में अच्छा किया बल्कि सामाजिक कामों में भी सक्रिय रहे.

भारत के ध्वजवाहकों की रोचक कहानियां

ध्वजवाहक बनना कभी आसान नहीं रहता. कई बार खिलाड़ियों को इस भूमिका स्वीकार करने से पहले कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। उदाहरण के लिये, 2023 में एक युवा एथलीट ने कहा था कि वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति देखते हुए विदेश यात्रा नहीं कर सकेगा, परन्तु टीम की जरूरत देखी और अंततः ध्वजधारी बन गया.

ऐसे ही कहानियां हमें सिखाती हैं कि राष्ट्रीय प्रतीक को संभालना केवल शारीरिक ताकत से नहीं, बल्कि मनोबल और समर्पण से भी जुड़ा है. इसलिए जब आप किसी खेल के मैदान में ध्वजवाहक देखते हैं, तो याद रखें कि वह कई सालों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है.

यदि आप इस टैग पेज पर आते हैं, तो यहाँ आपको ऐसे लेख मिलेंगे जो ध्वजधारी खिलाड़ियों की यात्रा को विस्तार से बताते हैं – चाहे वह क्रिकेट में बाबर आज़ाम की विदेशियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन हो या लीडरशिप में एमएस धोनी का रिकॉर्ड‑तोड़ कारनाम.

इन कहानियों को पढ़कर आप न केवल खेल के आँकड़े समझ पाएँगे, बल्कि यह भी जानेंगे कि ध्वजवाहक बनना किस तरह से राष्ट्रीय आत्मविश्वास को बढ़ाता है. इस टैग की हर पोस्ट आपको एक नई प्रेरणा देगी और दिखाएगी कि कैसे छोटे‑छोटे कदम बड़े बदलाव लाते हैं.

आखिरकार, ध्वजधारी सिर्फ इवेंट में नहीं रहते; वह रोज़मर्रा के जीवन में भी हमें याद दिलाते हैं कि हम सभी भारतीयों को गर्व है. तो अगली बार जब आप किसी खेल का प्रसारण देखेंगे, तो ध्वजवाहक की कहानी पर एक नज़र जरूर डालें – यह आपके राष्ट्रीय भावनाओं को और मजबूत करेगा.

पेरिस पैरालंपिक्स 2024 समापन समारोह: विवरण, भारत के ध्वजवाहक, लाइव स्ट्रीमिंग जानकारी और कहां देखें

पेरिस पैरालंपिक्स 2024 समापन समारोह: विवरण, भारत के ध्वजवाहक, लाइव स्ट्रीमिंग जानकारी और कहां देखें

पेरिस पैरालंपिक्स 2024 का समापन समारोह रविवार, 8 सितंबर, 2024 को स्टेड डी फ्रांस में होगा। इस समारोह के दौरान भारत के ध्वजवाहक हरविंदर सिंह और प्रीति पाल होंगे। भारतीय दल ने इस आयोजन में कुल 7 स्वर्ण, 9 रजत और 13 कांस्य पदक जीते हैं। यह कार्यक्रम जीयो सिनेमा और डीडी स्पोर्ट्स चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।

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श्रेणियाँ: खेल

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