अंतरिम अध्यक्श क्या है? समझिए पूरी बात
जब किसी संगठन या पार्टी में अध्यक्ष का पद अचानक खाली हो जाता है, तो तुरंत एक अस्थायी नेता चुना जाता है। यही होता है अंतरिम अध्यक्श का काम। उनका मुख्य मकसद तब तक व्यवस्था चलाते रहना जब तक स्थायी चुनाव न हो जाए।
अंतरिम अध्यक्श की जिम्मेदारियां
पहले तो वे दिन‑रात के फैसलों में भाग लेते हैं—बैठकों को बुलाना, नीति बनाना और मौजूदा कामकाज़ को आगे बढ़ाना। लेकिन बड़े बदलाव या नई योजना शुरू नहीं कर सकते; उनका काम मौजूदा चीज़ों को स्थिर रखना है।
उदाहरण के तौर पर जब रतनाथ सिंह ने SCO बैठक में भारत की ओर से अस्थायी पद संभाला, तो उन्होंने तुरंत आतंकवाद‑विरोधी बयानों से देश का रुख साफ किया। यह दिखाता है कि अंतरिम अध्यक्श भी विदेश नीति जैसे अहम मुद्दों को संभाल सकते हैं, पर बड़े रणनीतिक निर्णय आमतौर पर स्थायी अध्यक्ष के बाद होते हैं।
चयन प्रक्रिया और कार्यकाल
अधिकांश पार्टियों में नियम लिखा होता है कि अगर मुख्य नेता असमर्थ हो जाए तो कौन बैक‑अप होगा। अक्सर यह वरिष्ठ सदस्य या उपाध्यक्ष से तय किया जाता है। चुनाव के बीच में उनका कार्यकाल केवल तब तक रहता है जब तक पार्टी का सामान्य सम्मेलन या बोर्ड नया अध्यक्ष चुन नहीं लेता।
इस प्रक्रिया की वजह से राजनीतिक अस्थिरता कम होती है। जैसे बीजेपी में विष्णु प्रसाद शुक्ला के निधन पर तुरंत एक अंतरिम समिति बनाकर पार्टी को दिशा दी गई, जिससे कार्यवाही रुकनी नहीं पड़ी।
अगर आप किसी संगठन में काम करते हैं और अचानक शीर्ष पद खाली हो जाता है, तो पहले अपने संस्थागत नियम देखें। कई बार संविधान या बाइलॉज़ में स्पष्ट लिखा होता है कि अंतरिम अध्यक्श कौन होगा और उसकी शक्ति कितनी सीमित रहेगी।
सारांश में, अंतरिम अध्यक्श का काम स्थिरता बनाये रखना है—नया दिशा नहीं, बल्कि मौजूदा राह को आगे ले जाना। यह भूमिका खासकर बड़े राजनीतिक या कॉरपोरेट बदलावों के समय बहुत उपयोगी साबित होती है। अगर आप इस पद से जुड़ी कोई खबर या अपडेट चाहते हैं तो हमारी साइट पर "अंतरिम अध्यक्श" टैग देखें; यहाँ रोज़ नई जानकारी मिलती रहती है।

भारतरुहारी महताब ने 18वीं लोकसभा के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में शपथ ली
सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सात बार के सांसद और भाजपा सदस्य भारतरुहारी महताब को नई गठित 18वीं लोकसभा के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में शपथ दिलाई। महताब और उनके साथ अध्यक्षों के एक पैनल को सोमवार और मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है क्योंकि विजेता उम्मीदवार 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।
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