सुनिल गावस्कर – भारत के सबसे बड़े टेस्ट बल्लेबाज़ की कहानी
अगर आप भारतीय क्रिकेट का इतिहास देखेंगे, तो सुनिल गावस्कर नाम हमेशा सामने आएगा। उनका खेल‑शैली और रनों ने 70‑80 के दशक में टीम को नई दिशा दी थी। आज भी फैंस उनके रिकॉर्ड को याद करते हैं और युवा खिलाड़ी उनसे सीखते हैं।
कैसे बने "मास्टर ब्लेसर"?
गावस्कर का पहला टेस्ट डेब्यू 1971 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ हुआ था। उस मैच में उन्होंने सिर्फ 4 रनों से शुरुआत की, पर अगले दिन 65 रन बनाकर सबको दिखा दिया कि वे आने वाले दिनों में बड़े नाम बनेंगे। उनका सबसे बड़ा रहस्य था धीरज – जब गेंदबाज तेज़ी से चलाते थे तो वह धीरे‑धीरे घुमा‑घुमा कर रनों को इकट्ठा करते थे। इस शैली ने उन्हें "मास्टर ब्लेसर" बना दिया, यानी जो भी गेंदबाज़ उनका सामना करता, वही गिरता था।
गावस्कर के पास कई अद्भुत रिकॉर्ड हैं: वह पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने 10 साल में 3000+ टेस्ट रन बनाए और सात लगातार शतक लगाए। उनकी सबसे तेज़ शतकीय यात्रा 195 गेंदों पर पूरी हुई, जो आज भी कई लोग नहीं तोड़ पाए। इन आँकड़ों ने उन्हें सिर्फ एक महान बल्लेबाज़ ही नहीं, बल्कि टीम के भरोसेमंद कोर्नरस्टोन बना दिया।
गावस्कर की विरासत और आज का असर
आज भी उनके कई फॉलोअर हैं – चाहे वो टीवी पर मैच देख रहे हों या सोशल मीडिया पर चर्चा कर रहे हों। उनका बैटिंग ग्रिप, पैर के स्ट्राइड और शॉट चयन को कई युवा कोच सिखाते हैं। कई बड़े खिलाड़ी जैसे विराट कोहली, रोहित शर्मा ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि उन्होंने गावस्कर की तकनीक का अध्ययन किया था।
गावस्कर ने खेल के बाहर भी योगदान दिया – वह क्रिकेट कमेंट्री और लेखन में सक्रिय रहे हैं। उनके लिखे हुए कॉलम अक्सर बैटिंग टेक्निक या मैच स्ट्रेटेजी पर गहरी समझ देते हैं। इस तरह उन्होंने सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि शब्दों से भी नई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
अगर आप किसी नए खिलाड़ी के बारे में सोच रहे हों तो सबसे पहले सुनिल गावस्कर की बैटिंग क्लिप देखें। उनके शॉट्स को देख कर समझ आएगा कि कैसे सही टाइम पर पिच का उपयोग करके रन बनाते हैं। एक बार कोशिश करें, हो सकता है आपको भी उनका जैसा फोकस और धीरज मिल जाए।
संक्षेप में कहें तो सुनिल गावस्कर सिर्फ पुराने समय के स्टार नहीं, बल्कि आज भी क्रिकेट की बुनियादों को मजबूत करने वाले दिग्गज हैं। उनके रिकॉर्ड, शैली और सीख हमें हमेशा याद दिलाते रहेंगे कि असली बैटिंग का मतलब क्या है।

सुनिल गावस्कर ने ऋषभ पंत की मेलबर्न टेस्ट में विकेट फेंकने पर की कड़ी आलोचना
पूर्व भारतीय कप्तान सुनिल गावस्कर ने मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऋषभ पंत की लापरवाही से हुई आउट होने पर कड़ी आलोचना की। पंत ने अपनी पारी के दौरान 28 रन बनाए और उनका शॉट चयन स्थिति के अनुसार उपयुक्त नहीं था, जिससे गावस्कर ने पंत के बल्लेबाजी क्रम पर भी सवाल उठाए। यह घटना उनके बल्लेबाजी स्टाइल और इसके टेस्ट क्रिकेट के लिए उपयुक्तता के बारे में बहस को जन्म दे रही है।
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